- Sung by
- Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet
- Album
- Dhyan Geeta (ध्यान गीता) (2003)
- Length
- 7:09
साकी रख गई भरी बोतल, है जाम सजा मेरे आगे।
सब रिंद जमा हो पूछ रहे, जो आया भोगें या त्यागें।
मैं कहता बस अब पीता जा, बस जाग जरा और जीता जा।
जागरणं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
तू बना फकीरा वेश जगत का देख तमाशा साक्षी बन।
आनंद सहित स्वीकार करो, प्रभु पिला रहा है साकी बन।
क्यों प्याज छीलता है मुल्ला, रब परस रहा जब रसगुल्ला।
आनंदं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
पीने को जब भी जाम उठा, प्याले का हरदम होश रहे।
मंजिल पाकर भी कुछ आगे चलने का भीतर जोश रहे।
पल भर की मूर्च्छा जीवन में, सीता लुट जाती है वन में।
अमूर्च्छा शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
जो नहीं काम में उतर सका, निष्काम भला वह क्या होगा।
जिसने न कभी भी प्रेम किया, भगवान भला वह क्या होगा।
है काम राम का द्वार अहो, राधा बिन कैसा श्याम कहो।
निष्कामं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
कल की हम बात करें कैसे, क्या पता कि कल क्या मौसम हो।
हों कौन रिंद पीने वाले किसकी क्या खुशियाँ, क्या गम हो।
इसलिए आज जी भर के पी, बस अभी यहीं जी भर के जी।
अथ अद्यं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
