- Sung by
- Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet
- Album
- Dhyan Geeta (ध्यान गीता) (2003)
- Length
- 5:50
सब एक साल में एक बार होली का पर्व मनाते हैं।
योगी सालों भर मस्ती का गुलाल-अबीर उड़ाते हैं।
साँसो का लेकर इकतारा, मस्ती का गीत सुना प्यारा।
आनंदं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
सूर्योदय से पहले घंटे भर, साधक नियमित चला करे।
रात्रि में सोने से पहले, चक्रमण घड़ी भर किया करे।
बल, बुद्धि, वीर्य बढ़ता इससे, साधक निरोग रहता इससे।
निर्व्याधिं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
हर आती साँस जनम नूतन, हर जाती साँस मौत का क्षण।
दोनों के मध्य ठहर जाओ, तो काहे का फिर जन्म-मरण?
है आदि नहीं, है अंत नहीं, वह अलख निरंजन सत्य तुम्हीं।
अथ शाश्वत शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
जाती साँसें गहरी हों तो, जीवन अमृत बन जाता है।
आती साँसें लंबी हों तो, आनंद मधुर छा जाता है।
शांति से पुलक जो आता है, आनंद वही कहलाता है।
आनंदं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
हर साँस राम-सागर से लहरों जैसी उठने-गिरने दो।
साँसों की माला से साक्षी को हरि का नाम सुमिरने दो।
हर वृत्ति लहर बन जाने दो, साक्षी सुमिरन बच जाने दो।
अथ मौनं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
