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Osho

सम्यक दृष्टि

Samyak Drishti

Sung by Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet · full lyrics

Sung by
Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet
Album
Dhyan Geeta (ध्यान गीता) (2003)
Length
8:59
Lyrics

जीवन विराट है सागर-सा, हम ऊपर-ऊपर जीते हैं;

घटनाएं हैं लहरों जैसी, हम बहुत अर्थ दे देते हैं।

क्या हुआ जो एक साकी रूठी? क्या हुआ जो एक प्याली फूटी?

अथ अमृत शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

सोचो, यदि प्याली ना फूटे, सोचो, यदि साकी ना रूठे;

तो कैसे होश में आएं हम? कैसे अपने घर जाएं हम?

यदि प्यास न थोड़ी हो बाकी, कैसे मुर्शिद मिले साकी?

अथ सद्गुरु शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

बीते का जिसको शोक नहीं, जो वर्तमान में जीता है;

वह पा लेता अपनी मंजिल, उसका जीवन एक गीता है।

पढ़ लेता जो अपनी किताब, पा जाता जीवन का सुराग।

स्वाध्यायं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

माना अस्वीकृति दुखदायी, पर देखो कितना जग विशाल;

फूलों की कोई कमी नहीं, हे भ्रमर, विगत का क्यों मलाल?

फैलाओ पंख उड़ान भरो, कुछ नए गीत, सुर, तान भरो।

अथ नूतन शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

जो जीवन दुख में पका नहीं, कच्चे घट-सा रह जाता है;

जो दीप हवाओं से न लड़ा, वह जलना सीख न पाता है।

इसलिए दुखों का स्वागत कर, दुख ही मुक्ति का है आकर।

अथ सत्यं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

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