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Osho

ज्ञान योग

Gyan yog

Sung by Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet · full lyrics

Sung by
Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet
Album
Dhyan Geeta (ध्यान गीता) (2003)
Length
7:37
Lyrics

मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे में, जा कब तक शीश झुकाओगे?

कब तक रामायण, गीता से, अपने मन को बहलाओगे?

कब खुद को शीश झुकाओगे, कब खुद गीता बन जाओगे?

आत्मानं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

शास्त्रों को पढ़कर क्या होगा? शब्दों को रटकर क्या होगा?

जब तलक शेष है राग-द्वेष, जब तलक वासना, मोह शेष।

जब तलक धर्म अचारण न हो, तबतलक न कोई श्रमण अहो।

आचरणं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

है काम, क्रोध, मद, लोभ लहर, ईर्ष्या, विद्वेष, विमोह लहर।

हर विदा लहर, हर मेल लहर, धन, योवन का सब खेल लहर।

लहरों को जिसने पहचाना, उसने ही सागर को जाना।

जागरणं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

साक्षी धूनी बन जाने दो, ईर्ष्या-विद्वेष करो स्वाहा।

आनंद-धूप का धुआँ उठे, खुशबू बनकर निकले आहा।

कुछ ऐसा ध्यान-दीप बारो, घर आ जाएं धाम चारों।

अथ साक्षी शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

कामना छोड़ वासना छोड़, कल्पना छोड़कर जाग अभी।

जो है उसका स्वीकार करो, अन्यथा हेतु मत भाग कभी।

छोड़ो तृष्णा विश्राम करो, साक्षी होकर आराम करो।

विश्रामं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

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