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Osho

भक्ति योग

Bhakti yog

Sung by Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet · full lyrics

Sung by
Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet
Album
Dhyan Geeta (ध्यान गीता) (2003)
Length
7:02
Lyrics

जग कहता उसको दुश्चरित्र, जो प्यार किसी से करता है।

और सच्चरित्र कहता उसको, जो रूखा-सूखा रहता है।

नासमझों का यह गाँव अरे, आ चलें जहाँ सद्भाव अरे।

सद्भावं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

मत सुनो शेख की, पंडित की, तुम अपने दिल का गीत सुनो।

कुछ कहो हालेदिल रहबर से, जो कहे तुम्हारा मीत सुनो।

मत गीता, ग्रंथ, कितेब पढ़ो, ढाई आखर का वेद पढ़ो।

अथ श्रवणं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

चाहे तैरा हो सप्त सिंधु, चाहे गौरी शंकर जीता।

डूबा जो न प्रिय की आँखों में, उसका जीवन यूं ही बीता।

जो समझ न पाया आँखों से, वह क्या समझेगा बातों से।

अथ दृष्टि शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

यदि हाथ चाहते ईश्वर का, पहले दिलवर का हाथ गहो।

मन से मन का स्पर्श करो, आत्मा से आत्मा को छू लो।

जब गहन प्रेम में जाओगे, हर हाथ उसी का पाओगे।

स्पर्शं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

है जहाँ प्रेम है धर्म वहीं, हर प्रेयसि राधा रानी है।

हर प्रेमी ब्रज का कृष्ण और गीता हर प्रेम-कहानी है।

जिसने न कभी है प्रेम किया, उसने यह जीवन व्यर्थ जिया।

अथ प्रेमं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

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