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Osho

कर्म योग

Karmyog

Sung by Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet · full lyrics

Sung by
Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet
Album
Dhyan Geeta (ध्यान गीता) (2003)
Length
7:50
Lyrics

कर्मस्थल बन जाए मंदिर, घर को आश्रम बन जाने दो।

हर साँस बोध के साथ चले, हर बात भजन बन जाने दो।

गुरु साकी तू पीनेवाला, जीवन बन जाए मधुशाला।

अथ साक्षी शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

जिन्दगी एक सीता-सी है, संसार भयानक कानन है;

पल भर जो प्रहरी दूर हुआ, हरने को खड़ा दशानन है।

इसलिये स्वर्णमृग मत मांगो, लक्ष्मणरेखा को मत लांघो।

अथ साक्षी शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

तन से हो या कि मन से हो, हो साक्षी की निगरानी में।

वरना तुम जो भी करते हो, जुड़ जाता आनी-जानी में।

साक्षी होकर सब कर्म करो, है यही सनातन धर्म अहो।

अथ साक्षी शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

कर्मों की आपाधापी में, तुम होश नहीं अपना खोना।

अनुकूल हुआ तो मत नाचो, प्रतिकूल हुआ तो मत रोना।

है नहीं कृत्य कोई महान, है किया होश में मूल्यवान।

अथ ध्यानं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

तुम कर्म करो लेकिन सोचो, जो भी होगा अच्छा होगा।

वह आज भले प्रतिकूल लगे, कल निश्चय ही अच्छा होगा।

जग का जो भी है निर्माता, मंगल की ओर लिए जाता।

भवितव्यं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

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