- Sung by
- Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet
- Album
- Dhyan Geeta (ध्यान गीता) (2003)
- Length
- 8:52
है कौन सही, है कौन गलत, क्या रखा इस नादानी में;
कौड़ी की चिंता करने में, हीरा बह जाता पानी में।
जब भी शिकवा शिकायत हो, जानना तुम्हीं खलनायक हो।
अथ प्रेमं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
मूढ़ों का रस है प्रभुता में, प्रतिभाशाली झुक जाते हैं;
जीवन की ऊर्जा को सज्जन, यूं ही लड़कर न गंवाते हैं।
सीना ताने चलता दुर्जन, नम्रता संत का है लक्षण।
नम्रत्वं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
प्रतिक्रिया कभी हो तो समझो, तुमने घटना को मूल्य दिया;
थी लहर जरा-सी लेकिन तुमने, सागर-सा बहुमूल्य किया।
अब छोड़ो सब प्रतिशोध अहो, करते जाओ अनुरोध अहो।
अनुरोधं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
संबंध बढ़ाते हो जब-जब, जानना एक दिन टूटेगा;
जो मान दे रहा आज तुझे, वह यार एक दिन रूठेगा।
उस दिन मत तनिक ग़िला करना, कहकर शुक्रिया विदा करना।
भवितव्यं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
तुम क्षमाशील हो क्षमा करो, उनको जो अपराधी तेरे;
तुम भी तो क्षमा चाहते हो, अपराध किए जो बहुतेरे।
प्रतिशोध अग्नि का शमन करो, अब क्षमाशीलता वरण करो।
अथ प्रेमं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
