- Sung by
- Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet
- Album
- Dhyan Geeta (ध्यान गीता) (2003)
- Length
- 8:46
जब भी बाधा आए पथ में, उसको सोपान बना लेना।
अपमान करे कोई, शिव-सा विषपान बना लेना।
मत कभी शोक या मोह करो, हो कृत्य कोई तुम योग करो।
अथ योगं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
जो टूट गए संकल्प कभी, फिर से उनका उद्धार करो।
जो साथी पथ में रूठ गए, उनसे फिर आँखें चार करो।
तुम पहल करो, आलस छोड़ो, टूटे संबंधों को जोड़ो।
प्रतिबद्धं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
हो मार्ग कहीं अवरूद्ध अगर, कुछ नूतन राह तलाश करो।
बहती दरिया से कुछ सीखो, सम्यक रह सतत प्रयास करो।
हर शिला खड़ी रह जाती है, सरिता आगे बढ़ जाती है।
अथ प्रज्ञा शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
निष्ठापूर्वक निज कर्म करो, जग को जो भाए कहने दो।
हाथी-सा तुम मदमस्त चलो, कुत्ते भूंकते हैं भूंकने दो।
निष्ठा की आग न छुपती है, संकल्प नदी कब रुकती है?
अथ निष्ठा शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
बेहतर होगा तुम लिख डालो, अपने जीवन का संविधान।
संकल्प सहित पालन करना, अब शेष रहे या जाए प्राण।
जो रहता है संकल्पहीन, उसका जीवन है अर्थहीन।
संकल्पं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।
