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Osho

सम्यक संबंध

Samyak Sambandh

Sung by Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet · full lyrics

Sung by
Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet
Album
Dhyan Geeta (ध्यान गीता) (2003)
Length
7:23
Lyrics

गौतम ने कहा-भिक्षुओ सुनो, मन ही सुख-दुख का मूल अहो;

जो है उसका करता न मान, कुछ नहीं मिला तो परेशान।

मन है अशांत तो जो भी करो, आएगा दुःख अनिवार्य अहो।

अथ शांतिं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

जैसे चक्का पीछे-पीछे, बैलों के चलता जाता है;

वैसे ही हो यदि मन चंगा, सुख की गंगा ले आता है।

सारा जग है मन की माया, मन से ही धूप, मन से छाया।

प्रमुदित मन शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

लगता होगा यह बहुत बार, कुछ लोग नहीं सुनते तुमको;

घायल हो जाता अहंकार, दुख पागल कर देता मन को।

मत कथा गढ़ो या चिल्लाओ, नूतन अनुरोध किए जाओ।

अनुरोधं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

जो नहीं हुआ उसकी खातिर, यदि ज्यादा शोर मचाओगे;

जो है वह भी खो जाएगा, तुम व्यर्थ खड़े पछताओगे।

इसलिए नहीं जो मिला तुम्हें, उसके न लिए हो ग़िला तुम्हें।

सद्भावं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

कुछ करो मगर मत जिद्द करो, दुनिया चलती ही रहती है;

अंगद जैसा मत पांव टेक, बाजी उल्टी पड़ सकती है।

कोई न जरूरी दसकंधर, खा जाएगा पथ में ठोकर।

निर्दंभं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

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