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Osho

सम्यक कर्म

Samyak Karm

Sung by Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet · full lyrics

Sung by
Ma Amrit Priya, Sw Dev Geet
Album
Dhyan Geeta (ध्यान गीता) (2003)
Length
9:31
Lyrics

हम अपना लिखते भाग्य स्वयं, पर समय बीत जब जाता है;

ख़ुद का ही लिखा न पढ़ पाते, अक्षर धुंधला हो जाता है।

इसलिए नियति को मत मानो, अपना हस्ताक्षर पहचानो।

दायित्वं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

हम जो भी करते कर्म यहाँ, फल पीछे-पीछे आता है।

पुरुषार्थ कालक्रम में पककर, प्रारब्ध अटल बन जाता है।

है रची तुम्हीं ने आत्मकथा, मत कहो विधाता ने लिखा।

पुरुषार्थं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

सोना, सज्जन या साधु-संत, सौ बार टूट जुड़ जाते हैं;

दुर्जन कुम्हार के घट-से दरक गए न कभी मिल पाते हैं।

यदि हो जाओ सोना जैसा, जीवन में फिर रोना कैसा।

निरबैरं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

यदि थोड़ा भी हो रस बाकी, कर पहल दोस्ती कर लेना।

सौ तीरथ जाने से बढ़कर, एक रूठा यार मना लेना।

कहने को कोई हमारा है, तब तक ही यह जग प्यारा है।

अथ मैत्री शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

जुगनू जैसे थोड़ा जल-जल, जिंदगी न शोला बनती है;

पूजा, जप, स्तुति से न कभी, धूनी समाधि की जलती है।

साक्षी, प्रज्ञा, हरिनाम बिना, संबोधि मिली कब ध्यान बिना।

अथ ध्यानं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।।

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