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Osho

ओशो तुम बिन नगरी नगरी

Osho Tum Bin Nagri Nagri

Sung by Ma Amrit Priya · words by Swami Shailendra Saraswati · full lyrics

Sung by
Ma Amrit Priya
Written by
Swami Shailendra Saraswati
Album
Osho Birthday Songs 2024 (2024)
Length
11:22
Lyrics

ओशो तुम बिन नगरी-नगरी, सच्ची अलख जगाता कौन

ओंकार की राम-कहानी, दुनिया तक पहुँचाता कौन

भूली-बिसरी आत्मा का रस, फिर से हमें चखाता कौन

जगने के पथ पर इस सोये, जग को फिर चलवाता कौन

प्रश्नों का हल छिपा मौन में, ऐसी बात बताता कौन

प्रीति से भक्ति जन्मे - ये भेद हमें समझाता कौन

एक नहीं, दो-चार नहीं, जहां थीं लाखों आवाजें

ऐसे में फिर एक खुदा की, खामोशी सुनवाता कौन

चादँ-सितारे जुगनू-सूरज, सब के सब फीके पड़ गए

खुद के भीतर नूर खुदा का, बंदों को दिखलाता कौन

दरिया प्यासा, मंदिर सूना, डरा-डरा सारा आलम

सहमों से खुश-फहम लतीफे, कहता कौन हँसाता कौन

अहंकार से मुक्ति दिलाकर, सच्चा प्रेम सिखाता कौन

जीवन ही है प्रभु, स्वयं में खोजो, हमें बताता कौन

जागृति-स्वप्न-सुषुप्ति के भी, पार है कुछ सिखलाता कौन

शून्य की नाव बना के हमको, भवसागर तरवाता कौन

इस अंधियारी दुनिया में, ध्यान के दीप जलाता कौन

रोम-रोम में बसे राम का, नाम हमें सुनवाता कौन

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