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Osho

ओशो के संन्यास के स्तंभ

Osho Ke Sannyas Ke Stambh

Sung by Ma Amrit Priya · words by Sw Omanand Saraswati (Osho Neelanchal) · full lyrics

Sung by
Ma Amrit Priya
Written by
Sw Omanand Saraswati (Osho Neelanchal)
Album
Osho Birthday Songs 2025 (2025)
Length
10:06
Lyrics

ओशो के संन्यास के, स्तंभ हैं ये चार

जीवन का सम्मान ध्यान, प्रेम ओंकार।

है धन्यवाद गुरुवर, आभार ही आभार।

अस्तित्व की करुणा से हमें जिंदगी मिली

मिट्टी में चेतना की कैसे जोत जल गई?

अदभुत रहस्य है ये, भगवान का उपहार।

है धन्यवाद गुरुवर, आभार ही आभार।

ध्यान की बस्ती में सजी होश की डगर

साक्षी पुरुष निहारे, तन-मन का ये नगर

क्षण-क्षण में जागते हुए, रहे दृश्यों के पार

है धन्यवाद गुरुवर, आभार ही आभार।

सोपान चार प्रीति के, जब चढ़े प्राण शक्ति

वात्सल्य, मैत्री, श्रद्धा; भक्ति से मिले मुक्ति।

सब मुझ में हैं, मैं सब में, अद्वैत का ये सार।

है धन्यवाद गुरुवर, आभार ही आभार।

ओम से उपजी ये सृष्टि, ओम ही है कर्ता

ओम में जो डूबता , ओम- स्वरूप होता।

है स्रोतहीन गूंजती धुन, एक चमत्कार।

है धन्यवाद गुरुवर, आभार ही आभार।

इन चार स्तम्भों पे बनाया, ओशो ने ये मंदिर

साधना का सहज रास्ता दिखाया अंदर।

परमात्मा के प्यासों पे तुमने किया उपकार।

है धन्यवाद गुरुवर, आभार ही आभार।

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