- Sung by
- Ma Amrit Priya
- Written by
- Sw Anand Siddharth
- Album
- Jabse Dekha TuNe Osho (2018)
- Length
- 9:57
मेरी जिन्दगी की धूप में, तू छांव बनके आना
मैं जहां-जहां पुकारूं, तू ठांव बन के आना
संसार की हवाएं तोड़ें जब मेरे घर को
जब भी उजड़ मैं जाउं, तू गांव बन के आना
नहीं सूझता हो कुछ भी, दिखता हो बस समंदर
मेरे बचाव खातिर, तब नाव बन के आना
प्यासी हो मेरी संगत, गर ऐसा दौर आए
तर करने कंठ उनका, दरियाव बन के आना
थक जाएं हम सफर में, हो जाए कठिन चलना
मंजिल को पास लाने, तू पांव बन के आना
‘मुर्शिद’ की रहनुमाई में चल रहे हैं हम सब
गर रास्ता न सूझे, तो भाव बन के आना
