← Swami Gyan Avinash
8:28
तुम जैसे हो वैसे ही अपने को स्वीकार कर लो, छोड़ो सारे पाखंड।
26 Oct 2021
1:33:07
22/10/2021 SATSANG AT TITHAL, VALSAD, GUJARAT
26 Oct 2021
10:48
बाहर से क्या उपाय है किसी और के ज्ञान के सम्बंध में जानने का?
25 Oct 2021
12:55
जब तक तुम कमजोर हो तो बाहर की हर परिस्थिति मूल्यवान है।
24 Oct 2021
5:15
मांसाहार से मेरा ध्यान में जाना प्रभावित होता है क्या?
23 Oct 2021
5:58
तुम्हारे मिटते ही सारी बात बन जाती हैं।
23 Oct 2021
12:55
माता पिता और बच्चो के साथ ध्यान का समन्वय कैसे बनाए ?
22 Oct 2021
5:33
सम्मान की आकांक्षा वही कर्ता है जो भीतर से असम्मानित महसूस करते हैं।
21 Oct 2021
28:15
01/10/2021 Qus & Ans
20 Oct 2021
12:51
और भर लूं , बस यहीं संसार है। वह चाहे बाहर हो या भीतर हो।
20 Oct 2021
6:02
हम सब अपने को बचाने में लगे हैं, बचाना ही अपना दुख है।
20 Oct 2021
6:37
वर्तमान के क्षण में ठहरने के लिए हम क्या करें ?
19 Oct 2021
8:35
ध्यान के अनुभव को नई उपलब्धि मत मान लेना।
18 Oct 2021
8:11
हमारा जो मन है वह बचता है वर्तमान के क्षण से।
18 Oct 2021
17:14
तुम कुछ भी करो तुम असहज हो जाते हो। 30/09/2021
16 Oct 2021
7:26
वह सहजता फिर से लौट आती है, फिर से बच्चे हो जाते हो।30/09/2021
13 Oct 2021
12:50
एक बुद्ध के साथ चलना क्या पहले से तय होता है?
12 Oct 2021
7:48
तुम्हारा ठीक से खोना ही पर्याप्त है, कैसे खोते हो वह गौण है।30/09/2021
12 Oct 2021
12:34
तुम ठीक से गड्ढा हो जाओ परमात्मा अपने से ही भर देगा। 30/09/2021
10 Oct 2021
4:13
जीवित बुद्ध के करीब मन की मालकीयत खो जाती हैं इसलिए बैचनि बढ़ जाती हैं। 30/09/2021
08 Oct 2021
9:20
ध्यान में बैठना अच्छा नहीं लगता है, मगर प्रकृति के सानिध्य मैं आनंद आता है। 30/09/2021
06 Oct 2021
1:09:01
PERSONAL QUS SWAMI GYAN AVINASH
05 Oct 2021
6:52
विचारो का खोना नही तुम्हारा खोना ध्यान है। 30/09/2021
04 Oct 2021
7:53
फिर से आई सहजता को स्वीकार करना कठिन होता है। मन राजी नहीं होता। 30/09/2021
02 Oct 2021
Question / Answer
Playlists
All videos 1,742
Question / Answer 939ALL LIVE SATSANG OF SW.GYAN AVINASH 451Celebration 194Sanyash 135Meditation 98Meditation live 29Adhyatma Saral Sabdon Main 22
8:28
तुम जैसे हो वैसे ही अपने को स्वीकार कर लो, छोड़ो सारे पाखंड।
26 Oct 2021
1:33:07
22/10/2021 SATSANG AT TITHAL, VALSAD, GUJARAT
26 Oct 2021
10:48
बाहर से क्या उपाय है किसी और के ज्ञान के सम्बंध में जानने का?
25 Oct 2021
12:55
जब तक तुम कमजोर हो तो बाहर की हर परिस्थिति मूल्यवान है।
24 Oct 2021
5:15
मांसाहार से मेरा ध्यान में जाना प्रभावित होता है क्या?
23 Oct 2021
5:58
तुम्हारे मिटते ही सारी बात बन जाती हैं।
23 Oct 2021
12:55
माता पिता और बच्चो के साथ ध्यान का समन्वय कैसे बनाए ?
22 Oct 2021
5:33
सम्मान की आकांक्षा वही कर्ता है जो भीतर से असम्मानित महसूस करते हैं।
21 Oct 2021
28:15
01/10/2021 Qus & Ans
20 Oct 2021
12:51
और भर लूं , बस यहीं संसार है। वह चाहे बाहर हो या भीतर हो।
20 Oct 2021
6:02
हम सब अपने को बचाने में लगे हैं, बचाना ही अपना दुख है।
20 Oct 2021
6:37
वर्तमान के क्षण में ठहरने के लिए हम क्या करें ?
19 Oct 2021
8:35
ध्यान के अनुभव को नई उपलब्धि मत मान लेना।
18 Oct 2021
8:11
हमारा जो मन है वह बचता है वर्तमान के क्षण से।
18 Oct 2021
17:14
तुम कुछ भी करो तुम असहज हो जाते हो। 30/09/2021
16 Oct 2021
7:26
वह सहजता फिर से लौट आती है, फिर से बच्चे हो जाते हो।30/09/2021
13 Oct 2021
12:50
एक बुद्ध के साथ चलना क्या पहले से तय होता है?
12 Oct 2021
7:48
तुम्हारा ठीक से खोना ही पर्याप्त है, कैसे खोते हो वह गौण है।30/09/2021
12 Oct 2021
12:34
तुम ठीक से गड्ढा हो जाओ परमात्मा अपने से ही भर देगा। 30/09/2021
10 Oct 2021
4:13
जीवित बुद्ध के करीब मन की मालकीयत खो जाती हैं इसलिए बैचनि बढ़ जाती हैं। 30/09/2021
08 Oct 2021
9:20
ध्यान में बैठना अच्छा नहीं लगता है, मगर प्रकृति के सानिध्य मैं आनंद आता है। 30/09/2021
06 Oct 2021
1:09:01
PERSONAL QUS SWAMI GYAN AVINASH
05 Oct 2021
6:52
विचारो का खोना नही तुम्हारा खोना ध्यान है। 30/09/2021
04 Oct 2021
7:53
फिर से आई सहजता को स्वीकार करना कठिन होता है। मन राजी नहीं होता। 30/09/2021
02 Oct 2021