← Swami Gyan Avinash
25:59
यहां तरंगे अपने से उठती हैं और अपने से विसर्जित होती हैं बस तुम ठीक से देख लो।
17 Dec 2021
7:21
पुरुष के लिए ध्यान और स्त्री के लिए प्रेम ऐसा क्यों कहा ओशो ने ?
15 Dec 2021
7:45
सहज योग सबसे कठिन योग हैं।
15 Dec 2021
14:50
ओशो क्या कम थे की कही और की शरण मे जाना है ?
15 Dec 2021
4:57
बाहर की सारी विपरीत परिस्थिति तुम्हे निखार रही हैं।
13 Dec 2021
17:23
गहरा ध्यानी होने का भी अहंकार निर्मित हो जाता हैं। सावधान!
13 Dec 2021
12:47
तुम्हारा साक्षी रहना और बहना विरोधाभाषी नहीं है।
13 Dec 2021
15:14
चक्रों के चक्कर में उलझना मत।
11 Dec 2021
6:59
अपने स्वभाव मे फिर से लौट आना ही साधना है।
10 Dec 2021
8:53
SATSANG QUS ANS
10 Dec 2021
26:30
विपासना आखरी बात है, एक ठहराव है ।
08 Dec 2021
11:07
तुम प्रेम से भरे हो तो दुनिया भगवान से भरी है।
07 Dec 2021
9:03
कोई भी ध्यान विधि बिना मार्ग दर्शन के हानिकारक हो सकती है।
06 Dec 2021
10:40
जब तक ध्यान से कुछ पाना है तब तक ध्यान से ही चूक जाओगे।
04 Dec 2021
18:38
प्रेम ही है शुद्धतम परमात्मा।
03 Dec 2021
18:07
वह सहजता और सरलता की क्या व्याख्या है ?
03 Dec 2021
55:06
21/11/2021 SATSANG AT AMARKANTAK MP
02 Dec 2021
14:08
जोरबा दी बुद्धा का क्या अर्थ है?
01 Dec 2021
1:25:01
19/11/2021 SATSANG AT AMARKANTAK MP
28 Nov 2021
6:38
जहा साधना रुक ती है वही से अगली यात्रा शुरू होंगी।
26 Nov 2021
5:25
आस्तिक और नास्तिक दोनो ही चूक जाते हैं , मगर प्रेमी पा लेता है।
26 Nov 2021
9:15
कर्ता ओर बहोसी एक ही घटना की दो व्याख्या है।
24 Nov 2021
23:11
बाहर का सारा ज्ञान एक दिन बाधा बनाता है, रुकावट बनता है उसको गिराना पड़ेगा तभी बात बनेंगी।
24 Nov 2021
32:18
परमात्मा को वही खोजने निकलता है जिसे परमात्मा ने पहले ही खोज लिया है।
23 Nov 2021
Question / Answer
Playlists
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Question / Answer 939ALL LIVE SATSANG OF SW.GYAN AVINASH 451Celebration 194Sanyash 135Meditation 98Meditation live 29Adhyatma Saral Sabdon Main 22
25:59
यहां तरंगे अपने से उठती हैं और अपने से विसर्जित होती हैं बस तुम ठीक से देख लो।
17 Dec 2021
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पुरुष के लिए ध्यान और स्त्री के लिए प्रेम ऐसा क्यों कहा ओशो ने ?
15 Dec 2021
7:45
सहज योग सबसे कठिन योग हैं।
15 Dec 2021
14:50
ओशो क्या कम थे की कही और की शरण मे जाना है ?
15 Dec 2021
4:57
बाहर की सारी विपरीत परिस्थिति तुम्हे निखार रही हैं।
13 Dec 2021
17:23
गहरा ध्यानी होने का भी अहंकार निर्मित हो जाता हैं। सावधान!
13 Dec 2021
12:47
तुम्हारा साक्षी रहना और बहना विरोधाभाषी नहीं है।
13 Dec 2021
15:14
चक्रों के चक्कर में उलझना मत।
11 Dec 2021
6:59
अपने स्वभाव मे फिर से लौट आना ही साधना है।
10 Dec 2021
8:53
SATSANG QUS ANS
10 Dec 2021
26:30
विपासना आखरी बात है, एक ठहराव है ।
08 Dec 2021
11:07
तुम प्रेम से भरे हो तो दुनिया भगवान से भरी है।
07 Dec 2021
9:03
कोई भी ध्यान विधि बिना मार्ग दर्शन के हानिकारक हो सकती है।
06 Dec 2021
10:40
जब तक ध्यान से कुछ पाना है तब तक ध्यान से ही चूक जाओगे।
04 Dec 2021
18:38
प्रेम ही है शुद्धतम परमात्मा।
03 Dec 2021
18:07
वह सहजता और सरलता की क्या व्याख्या है ?
03 Dec 2021
55:06
21/11/2021 SATSANG AT AMARKANTAK MP
02 Dec 2021
14:08
जोरबा दी बुद्धा का क्या अर्थ है?
01 Dec 2021
1:25:01
19/11/2021 SATSANG AT AMARKANTAK MP
28 Nov 2021
6:38
जहा साधना रुक ती है वही से अगली यात्रा शुरू होंगी।
26 Nov 2021
5:25
आस्तिक और नास्तिक दोनो ही चूक जाते हैं , मगर प्रेमी पा लेता है।
26 Nov 2021
9:15
कर्ता ओर बहोसी एक ही घटना की दो व्याख्या है।
24 Nov 2021
23:11
बाहर का सारा ज्ञान एक दिन बाधा बनाता है, रुकावट बनता है उसको गिराना पड़ेगा तभी बात बनेंगी।
24 Nov 2021
32:18
परमात्मा को वही खोजने निकलता है जिसे परमात्मा ने पहले ही खोज लिया है।
23 Nov 2021